मासिक छत्तीसगढ़ी सुराज के 16 वें साल में प्रवेश पऱ आयोजित परिचर्चा… 
छत्तीसगढ़ी सुराज के प्रधान संपादक शंकर पांडे ने बस्तर में नक्सल वाद की सामाप्ति पऱ कहा, प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर बस्तर में वनों से आच्छादित पहाडिय़ां, उनमें उन्मुक्त विचरण करते वन्य प्राणी, मनो हारी जलप्रपातों के साथ कलकल बहती नदियां, रहनेवाले सीधे-सादेेलोग जंगली पारंपरिक नृत्य मन मोह लेते थे पर पता नहीं बस्तर को किसकी नजर लग गई… झीरम घाटी के नरसंहार के बाद विधायक भीमा मंडावी सहित 5 लोगों की हत्या आदि मामले निश्चित ही फिर सोचने मजबूर किया था कि क्या बस्तर,छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या का कोई तोड़ सरकार के पास नहीं है..? केरल राज्य से बड़ा बस्तर उत्तर से दक्षिण तक 215 किलोमीटर की लंबाई और पश्चिम से पूर्व तक 182 किलो मीटर की चौड़ाई तक फैले 39 हजार 114वर्ग किलोमीटर का बस्तर प्राकृतिक संपदा, जन जातीय संस्कृति,पुरा तत्व, प्राकृतिक स्थलों के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। कुछ सालों से सदाबहार, निस्तब्ध वनों की खुशबू में खौफ नाक जहर घोल दिया गया था नक्सली वारदातों,बारूद की दुर्गंध,निर्मम हत्याओं को लेकर चर्चा में रहा। 1972 में भोपालपट्नम में पहली बार नक्सली धमक सुनी गई थी, बाद में छग में नक्सली वार दात बढ़ती रही, दखल क्षेत्र बढ़ता गया। 76 सी आरपीएफ के जवानों की निर्मम हत्या, झीरम घाटी में 9 बार लोक सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बतौर निर्दलीय सांसद बनने वाले पूर्व नेता प्रति पक्ष महेन्द्रकर्मा अवि भाजित मप्र, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री का दायित्व सम्हालने वाले नंदकुमार पटेल,पूर्वविधायक उदय मुदलियार सहित 31 लोगों की शहादत हुई थी , दंते वाड़ा जेल ब्रेक में 299 नक्सलियों सहित कैदियों के फरार होने की वारदात हुई एक ट्रक बारूद बस्तर के जंगलों से गायब होने की खबर मिली थी, राज नांदगांव जिले के मान पुर जंगल में नक्सली वारदात में एसपी विनोद चौबे की हत्या की गई। बस्तर में बिगड़ते हालात के लिए आखिर जिम्मे दार कौन था ..? सीआर पीएफ 76 जवानों के सामूहिक नरसंहार के बाद तब के एसपी को हटा दिया गया, झीरम घाटी की बड़ी वारदात के बाद भी एसपी हटा दिये गये, कलेक्टर को सचिवालय अटैच कर दिया गया। दुनिया का सबसे बड़ा नक्सली जेल ब्रेक हुआ, डिप्टी जेलर को बर्खास्त कर दिया गया। क्या बस इसी से सरकार की जिम्मेदारी पूरी हो गई थी। छत्तीसगढ़ी सुराज के 16 वे स्थापना दिवस पऱ आयोजित परिचर्चा में वीडियो काल के माध्यम से जुड़े बस्तर के *आईजी पी. सुंदरराज कहते हैं कि बस्तर अब नक्सल मुक्त हो गया हैं। मार्च 2026 तक बस्तर लगभग पूर्णतः नक्सल मुक्त घोषित हो चुका है, जो4 दशकों के सशस्त्र संघर्ष का अंत है। सघन सुरक्षा अभियानों और ‘विश्वास, पुनर्वास और विकास’ की रणनीति से बस्तर (विशेषकर अबूझ माड़) से माओवादी कैडर समाप्त हो गए हैं। अब वहां मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों की मदद से विकासकार्य तेज किए जा रहे हैं। 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद के कैडर को समाप्त करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, और क्षेत्र को नक्सल मुक्त (96% तक) माना जा रहा है। पिछले एक दशक में 8 हजार से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। ‘400 से अधिक सुरक्षा शिविरों को अब स्कूल और अस्पतालों में बद लने योजना है हालाँकि सशस्त्र काडर कम हुआ है, लेकिन नक्सलियों द्वारा छोड़ी गई बारूदी सुरंगें अभी भी जवानों और स्थानीय लोगों के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं।बस्तर अब “डर से विकास” की ओर बढ़ रहा है, जहाँ “बस्तर की आवाज़” के माध्यम से शांति और बेहतर जीवन की मांग पूरी हो रही है।
संभाग आयुक्त डोमन सिंह का कहना हैं कि बस्तर की यह यात्रा केवल भौगोलिक परि वर्तन नहीं, मानसिक क्रांति है। यह उदाहरण है,जब नीतियां संवेदन शीलता से बनाई जाएं, विश्वास पर आधारित हों, तो सबसे कठोर रास्ते भी बदल सकते हैं. महिला नक्सलियों का आत्मसमर्पण, ग्रामीणों की सहभागिता और प्रशासन की प्रतिबद्धता मिलकर वह बस्तर बना रहे हैं, कल तक कल्पना था और आज सच्चाई है. बस्तर अब बंदूक से नहीं,किताब से पहचाना जाता है. यह वह धरती बन चुकी है जहां डर की जगह भविष्य बसता है – शांत, समृद्ध स्वाभि मानी भारत का प्रतीक बनकर। वरिष्ठ पत्रकार, इलेक्ट्रॉनिक मिडिया में एक राष्ट्रीय चैनल की छत्तीसगढ़ की संपादक तथा कई नक्सली वार दात की जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाली प्रियंका कौशल ने परिचर्चा में शिरकत करते हुये कहा,अब छ्ग में करीब 4 दशक के नक्सली आतंक से मुक्ति मिलने मिल चुकी है,यह एक सुखद खबर रहेगी साथ ही बस्तर सहित नक्सली प्रभावित क्षेत्रों के लिये विकास की नई इबादत भी बन रही हैं।वहीँ लोगों राहत की सांस भी ले रहे हैँ, वरिष्ठ पत्रकार विशाल यादव की मानेँ तो वह दिन आ ही गया ज़ब नक्सलवाद का नासूर छ्ग से खत्म हो गया । बस्तर के आम जन भयमुक्त होकर जीवन यापन कर रहे हैं , कई रहस्य अपने में समेटे बस्तर का देश विदेश के लोग दीदार कर सकेंगे। *वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ जावेद अली खान ने वीडियो काल के माध्यम से जुड़कर कहा, अब बस्तर में सामान्य लोगों का बेहतर ईलाज भी हो सकेगा, अभी नक्सल वाद के चलते निजी चिकित्सक बस्तर में बड़े अस्पताल खोलने से पर हेज करते थे। सीए रवि ग्वालानी का कहना है नक्सलवाद के चलते बस्तर का विकास प्रभा वित हुआ है, जाहिर है कि बस्तर के वनोपज, दुर्लभ जड़ी बूटीयों को नया बाजार मिलेगा, उद्योगपति भी बस्तर की तरफ आकर्षित होंगे,पर्य टन को बढ़ावा मिलेगा।बस सरकार को ईमान दारी से प्रयास करना होगा। आभार प्रदर्शन विशेष संवाददाता अनिल साखरे भिलाई ने किया।