टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी…. अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी… हार नहीं मानूँगा, रार नई ठानूँगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ… गीत नया गाता हूँ…

शंकर पांडे ( वरिष्ठ पत्रकार )   

छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारतरत्न अटलबिहारी बाजपेयी की उपरोक्त कविता का स्मरण आज जरुरी हैं,अटलजी (जन्म 25 दिसम्बर 1824) की इसी साल 100वीं जयंती है,तो छत्तीसगढ़ भी अपने निर्माण की 25 वीं जयंती मना रहा है,यह भी एक संयोग है।छत्तीसगढ़ के पुरुखों ने अपने राज्य का सपना देखा था,लम्बा संघर्ष भी किया,पूर्व पीएम अटल के समय यह सपना साकार भी हुआ।अटलजी का छग से गहरा लगाव था। उनके ही शासन काल में 1 नवंबर 2000 को छग का निर्माण हुआ, राज्यों की सूची मेंछग के रूप में 26 वां राज्यजुड़ा इसी कारण उन्हें छ्ग राज्य का निर्माता भी कहा जाता है। पूर्व पीएम,भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने 1990 से ही तय कर लिया था कि छत्तीसगढ़ को एक राज्य बनाना है, वे यहां की आदिवासी संस्कृति,वन संपदा से बेहद लगाव रखते थे। इसी कारण से मप्र से अलग छत्तीसगढ़ राज्य के सपने को उन्होंने बतौर पी एम साकार किया। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग केंद्र में हमारे पुरुखोँ ने संघर्ष किया,आचार्य नरेंद्र दुबे ने 1965 में ‘छत्तीसगढ़ समाज’ की स्थापना की, 1967 में डॉ.खूबचंद बघेल ने ‘ छत्तीसगढ़ी भ्रातृ संघ ’ बनाकर मांग को नयी जान दी।बाद में चंदूलाल चंद्राकर ने सर्वदलीय मंच के जरिए मांग को बुलंद किया,उनकी मौत के बाद मंच बिखर सा गया, संतकवि पवन दीवान ने ‘पृथक छत्तीसगढ़ पार्टी’ के नाम पर चुनाव भी लड़ा, राज्य निर्माण के लिये भी संघर्ष किया, इसके बाद विद्याचरण शुक्ल इस आंदो लन में कूद पड़े।दाऊ आनंद अग्रवाल ने तो छत्तीसगढ़ निर्माण के लिये रायपुर से दिल्ली तक अखंड धरना भी दिया, तो छत्तीसगढ़ी समाज के लम्बे संघर्ष की भी चर्चा जरुरी है (संघर्ष करनेवालों का उल्लेख तो संभव नहीं है)विद्याचरण शुक्ल के राज्य संघर्ष मोर्चा की गूंज दिल्ली तक जाने लगी।साल 1998-99 के चुनाव में भाजपा केकद्दा वर नेता अटलजी ने रायपुर पहुंचे।इस दौरान रायपुर के ऐतिहासिक सप्रेशालामैदान में जनता को संबोधित भी किया,छत्तीसगढ़ राज्य का वादा किया।बस शर्त उन्होंने इतनी रखी की भाजपा में छग से सभी 11 सांसद चाहिए..? चुनाव परिणामों में भाजपा को केवल 8सीटें ही मिली, केंद्र में अटलजी की सरकार बन गई।सर कार बनने के साथ ही अटलजी ने अपने वादे पर अमल करना शुरू किया। 25 जुलाई 2000 को मध्य प्रदेश राज्य पुन र्निर्माणविधे यक-2000 लोकसभा में पेश हुआ।इसके बाद 31 जुलाई 2000को लोकसभा में और 9 अगस्त को राज्य सभा में छ्ग निर्माण पर मुहर लग गई। 25 अगस्त को राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी,4 सिंतबर 2000 को राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को ‘छत्ती सगढ़ अस्तित्व में आया और अटल प्रतिज्ञा पूरी हुई छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद अटल बिहारी वाज पेयी नवंबर 2003 में अंबि कापुर पहुंचे थे। इस दौरान राजीव गांधी पीजी कॉलेज मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया था।इसमें रिकॉर्ड 1 लाख से अधिक लोग पहुंचे। यहां चुनावी परिणामों में पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस के वर्चस्व वाली सरगुजा जिले की 8 विधान सभा में से 7 सीटों में भाजपा को जीत मिली, जनता ने अटलजी को रिटर्न गिफ्ट दिया।प्रदेश में भाजपा ने 50 सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य में सर कार भी बनाई थी। 3 बार डॉ रमन के नेतृत्व मेंभाजपा की सरकार भी बनी थी।वर्त मान में भी भाजपा की सर कार काबिज है।

छ्ग की हीरा खदानऔर
सालों से कोर्ट का स्थगन 

छत्तीसगढ़ के विषय में पहले सीएम अजीत जोगी कहा करते थे-‘अमीर धरती गरीब लोग’ । फिर हम केंद्र सरकार की दया पर क्यों निर्भर रहें..? छग को अपने पैरों पर खड़ा कर आत्म निर्भर बनाने हीरा ही प्रमुख भूमिका निभा सकता है,पर इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। छ्ग को प्रकृति ने बड़ी फुरसत से गढ़ा है।44%क्षेत्र वनों से परिपूर्ण है।यहां हीरा की किम्बर लाईट पाईप होने की पुष्टि भी हो चुकी है।गरि याबंद के मैनपुर क्षेत्र मेंहीरा की मातृशिला किम्बर लाइट की 6 पाईपलाईन बेहराडीह,पायलीखंड,जांगड़ा,कोरोमाली,कोसमबुड़ा एवं बेहराडीह क्षेत्रों में होने की संभा वना प्रकट की गई है।बेहराडीह-पायलीखंड में किम्बर लाइट पाईप में हीरा होने की पुष्टि भी हो गई है।छ्ग के पहले सीएम अजीत जोगी के कार्यकाल में 20 02-2003 में निजी कंपनी के हीरा पूर्वेक्षण खनन लाय सेंस को निरस्त कर दिया गया था, संबंधित कंपनी ने हाईकोर्ट बिलासपुर से ‘स्थ गन’ ले लिया, बाद में प्रदेश में 15 साल तक भाजपा की सरकार रही, डॉ. रमन सिंह ही सीएम रहे,हाईकोर्ट में भी इस मामले में पेशी- दर-पेशी चलती रही…,15 साल की भाजपा की सत्ता के बाद 68 (उप चुनाव के बाद 71) सीटे जीतकर भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार भी बनी थी। 5 साल सरकार चली पर हीरा पूर्वेक्षण के मामले में न्याया लय में कुछ प्रगति नहींहुई? छग राज्य बना था तो इसे करमुक्त राज्य बनाने का सपना दिखाया गया था, उसका क्या हुआ…? भूपेश सरकार,किसानों कीउन्नति के लिए कुछ बड़े कदम उठाये, आदिवासियों की उन्नति के लिए प्रयास तेज किये थे,उन्हें विरासत में खराब आर्थिक स्थिति भी मिली थी,कोरोना संक्रमण -लॉक डाऊन के चलते भी आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ गई थी,भूपेश सर कार लगातार केन्द्र कीमोदी सरकार से आर्थिक पैकेज मांग करती रही, पर प्रदेश में कांग्रेस, केंद्र में भाजपा की सरकार होने से अपे क्षित सहयोग नहीं मिला? जहां तक गरियाबंद क्षेत्र में हीरे के विशाल भंडार का अनुमान 135 मिलियन टन है,जो दुनिया के बड़े हीरा भंडारों में एक बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां खनन शुरू होता है तो छग की अर्थ व्यवस्था को बड़ा बढ़ावा तो मिलेगा और राज्य में रोजगार केनए अवसर मिल सकतेहैं,खनन की संभावनाओं से राज्य को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है।अब भाजपा की विष्णु सरकार काबिज है, छग को आत्मनिर्भर बनाने गर्भ में छिपा हीरा ही बड़ी भूमिका निभा सकता है।सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर 22 सालों से बिलासपुर हाईकोर्ट में लंबित हीरा मामला किस स्थिति में है, निराकरण में आखिर क्या दिक्कतें हैं…?नई सरकार को चाहिये कि बड़े वकीलों का पैनल बना कर लंबित मामले का निरा करण करे,इसके लिएव्यक्ति गत रूचि भी लेनी ही होगी।

विवेकानंद की स्मृति को
सजोने में रूचि नहीं…. 

छत्तीसगढ़ के निर्माण को 25 साल पूरे होने को है, यह तय है कि हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है पर सीएम अजीत जोगी, डा रमन सिँह,भूपेश बघेलसभी ने स्वामी विवेकानंद ने राय पुर में जहाँ बचपन के कुछ माह बिताये थे, उस भवन को स्मारक बनाने की बात की, कार्यक्रम भी हुये पर उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो सकी है। स्वामीजी ने ही बालक नरेन्द्र के रूप में वर्ष 1877 में कुछ माह रायपुर में ही गुजारा था। माता- पिता तथा अपने परिजनों के साथ स्वामीजी ने घर पर ही अध्ययन किया था। स्व. आत्मानंद के एक लेख के मुताबिक जब जबलपुर से बैलगाड़ी से बालक नरेन्द्र रायपुर आ रहे थे तब करीब 15 दिन का समय लगा था, रास्ते में दोनों किनारों पर पत्तों और फूलों से लदे हरे वन वृक्ष थे।उन्नत शिखर, विंध्याचल में दोनों ओर के पहाड़ की चोटियां, आकाश को चूमती खड़ी थी, फल- फूल से लदी वृक्षों कीलताएं पर्वत कोअपूर्व शोभा प्रदान कर रही थी। मधुर कलरव करते रंग-बिरंगे पक्षी घूम रहे थे। कभी आहार की खोज में धरती पर उतर रहे थे।कुछ ऐसे ही दृश्य स्वामी जी के पटल में अंकित हो गये, संभवत: यह पहली भावानुभूति थी,अभी भी बूढ़ापारा बिजली आफिस के सामने मेघ मार्केट के करीब वह भवन सुरक्षित है जहां स्वामीजी परिवार के साथ कुछ समय रहे थे। वह कमरा अभी भी बंद रखा गया है। भवन को स्मारक बनाने की योजना भी बनी हैं। वैसे 2025 में स्वामी विवेकानंद के रायपुर आग मन के 148 साल पूरे हो रहे हैं।स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट तथा बूढ़ातालाब में स्वामीजी की मूर्ति स्था पना कर छग से संबंध दर्शाने का प्रयास तो हुआ ही है। पर भवन अभी भी उपेक्षित है,छ्ग की विष्णु सरकार ने तो अपने लगभग 2 साल के कार्यकाल में इस दिशा में रूचि ही नहीं ली… वित्तमंत्री ओ पी चौधरी तो रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं,उन्हें तो इसकी जान कारी होगी ही…?

और अब बस….

0 रायपुर में कलेक्टर रहे अजीत जोगी, छ्ग के सीएम बने तो नजीब जंग दिल्ली के उप राज्यपाल बने,ओपी चौधरी वर्तमान में वित्तमंत्री हैं।
0 लम्बे समय तक सांसद रहनेवाले रमेश बैस का 3 राज्यों का गवर्नर बनने का रिकार्ड बना है।
0छ्ग में लगातार 15 सालों तक सीएम बनने कारिकार्ड डॉ रमन सिंह के नाम है।
0छग के 21 साल के चित्रांश अग्रवाल को अमे रिका की कंपनी से तगड़ा जॉब ऑफर मिला है। एन आईटी रायपुर में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र चित्रांश को ₹76 लाख वार्षिक सीटीसी के हिसाब से रोजाना करीब ₹21,000 की सैलरी मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *