…जब हॉकी के सुनहरे दौर की यादें हुईं ताजा , गोलपोस्ट से लेकर पेनल्टी कॉर्नर तक के किस्से हुए जंवा

मिसबाह साहब के घर सीनियर खिलाड़ियों का मिलन
भोपाल। भारतीय हाॅकी के सुनहरे दौर के खिलाड़ियों ने अपने समय को याद किया तो जैसे हर एक खिलाड़ी मैदान में गोल दागने को आज भी तैयार हो, आज भी वही ऊर्जा उनकी बातों में दिखाई दे रही थी। चिंता थी तो बस भारतीय हाॅकी के वर्तमान और भविष्य की । भोपाल में हॉकी के नामी-गिरामी अंतरराष्ट्रीय सीनियर खिलाड़ियों का मिसबाह साहब के घर पर मिलन समारोह हुआ। इस दौरान भोपाल हॉकी के सुनहरे दौर की बातें खूब हुईं और सबने पुराने दिनों को याद किया।

पुराने दिनों की यादों में खो गए खिलाड़ी
मिलन में आए पुराने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भोपाल हॉकी के उस दौर को याद किया जब भोपाल ने देश को बड़े-बड़े खिलाड़ी दिए थे। सबने मैदान की रणनीति, कोचिंग और पुराने मैचों के किस्से सुनाए। मिसबाह साहब के घर का माहौल बिल्कुल पुराने समय जैसा बन गया था।

नई पीढ़ी के लिए सीख
सीनियर खिलाड़ियों ने कहा कि भोपाल हॉकी की परंपरा को आगे बढ़ाना जरूरी है। आज के युवा खिलाड़ियों को उस सुनहरे दौर की मेहनत और अनुशासन से सीख लेनी चाहिए। सभी ने मिलकर तय किया कि भोपाल हॉकी को फिर से उसी ऊंचाई तक पहुंचाया जाएगा।

मिसबाह साहब के घर हुआ यह मिलन सिर्फ यादों का जश्न नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा भी बन गया।

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