शंकर पांडे ( वरिष्ठ पत्रकार ) 
अविभाजित मप्र का विधानसभा भवन बनने में 40 साल का समय लगा था वहीं मप्र से अलग छत्तीस गढ़ के खुद का विस भवन 25 साल में बन गया,मप्र का विस भवन 1996 में लोकर्पित हुआ, लागत 56 करोड़ आई थी, वहीं छ्ग के विस भवन की लागत 324 करोड़ आई है।
जबलपुर में भी बना था
विधानसभा भवन…..
चार प्रांतों में बंटे मध्यप्रदेश विधानसभा के पुनर्गठन की चर्चा शुरू हुई तब जबलपुर को राजधानी बनाने पर निर्णय लिया गया था। शहर के बीच में करीब 7 एकड़ क्षेत्र में विधानसभा भवन का निर्माण शुरू कराया गया,संविधान सभा के अध्यक्ष डा.राजेंद्र प्रसाद ने 28 अक्टूबर 1948 में इस भवन की आधारशिला रखी थी।मप्र पुनर्गठन की बात सामने आने पर कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे सेठ गोविंद दास ने इमारत का निर्माण प्रारंभ कराया था,भवन बन कर तैयार हो गया लेकिन राज्य का पुनर्गठन किया गया तब अचानकराजनीति ने करवट ली, भोपाल को ही राजधानी घोषित कर दिया गया। अब वह शहीद स्मारक भवन के नाम से जाना जाता है।
मिंटो हाल से विधानसभा
भवन का सफऱ….. 
आजादी के बाद भोपाल विधानसभा का कार्यकाल मार्च 1952 से अक्टूबर 1956 तक लगभग साढ़े 4 साल तक रहा,इसके सीएम रहे डॉ शंकर दयाल शर्मा, विधानसभा के अध्यक्ष रहे सुल्तान मोहम्मद खान,उस समय विधानसभा,स्टेटबैंक चौराहा पर हुआ करती है, जहां वर्तमान में लोकायुक्त कार्यालय है, लेकिन राज्यों के पुनर्गठन के बाद तस्वीर बदल गई।राज्यों के पुन र्गठन के बाद नए मध्यप्रदेश का उदय हुआ,विधानसभा के लिए मिंटोहॉल का चयन किया गया,इसमें पहलीबार अलग-अलग विधानसभा के एकीकृत होने के बाद सारे प्रतिनिधि बैठे, पहले इस भवन को अतिथि गृह के रूप में इस्तेमाल किया जाता था,जिसके बाद सेना,पुलिस मुख्यालय, अन्य विभाग भी थे,वहीं शाही परिवार के बच्चे यहां स्केटिंग भी सीखा करते थे, 1956 तक हमीदिया कॉले ज लगता रहा, जिसके बाद 1नवंबर 1956 से यहभवन विधानसभा के रूप में परि वर्तित हुआ,अंग्रेजी राज्य, नवाबी हुकूमत के दौर के बाद लोकतंत्र के शासन के साक्षी’मिंटो हॉल’की कहानी 12नवंबर 1909 से शुरू हुई,तब के गवर्नर जनरल लॉर्ड मिंटो अपनी पत्नी के साथ भोपाल आए, भोपाल के शासक नवाब सुल्तान की बेगम को मेहमानों के रुकने के लिए इमारत की कमी महसूस हुई, जिसके बाद नई इमारत बनाने का फैसला लिया गया, शिला न्यास लॉर्ड मिंटो ने किया था, इमारत लगभग 24 साल में 3 लाख रुपए के खर्च से बनाई गई थी। मिंटो हॉल में सालों तक विधान सभा चलती रही, जिसके बाद1980 में नए भवन की जरूरत को ध्यान में रखकर 14 मार्च1981 में तब लोस अध्यक्ष बलराम जाखड़ ने अरेरा पहाड़ी पर विधान सभा भवन का शिलान्यास किया,लागत 10 करोड़ अनुमानित थी,लेकिन 12 सालों में यह इमारत 54 करोड़ खर्च से तैयार हुई, इसका उद्धाटन तब के राष्ट्र पति शंकर दयाल शर्मा ने 1996 में किया।
छ्ग विधानसभा…टेंट से
अभी तक का सफऱ…. 
छत्तीसगढ़ का निर्माण मप्र पुनर्गठन अधिनियम 2000 द्वारा किया गया था, जिसे 25 अगस्त 2000 राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया था,1नवंबर 2000 को छ्ग के निर्माण के साथ छत्तीस गढ़ विधानसभा अस्तित्व में आई। छग विधानसभा का पहला सत्र रायपुर के राज कुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में टेंट लगा आयोजित किया गया था। बाद में, विधानसभा रायपुर-बलौदा बाजार रोड पर विधाननगर में छग विधानसभा भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में नये भवन के लिये तब के सीएम भूपेश बघेल द्वारा 29 अगस्त 2020 को सोनिया,राहुल गांधी आदि की उपस्थिति में भूमिपूजन किया गयाथा,1नवम्बर 25 को नया भवन पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकर्पित किया, छग का नया विधानसभा भवन 51 एकड़ में फैला है, इसे 324 करोड़ की लागत से बनाया गया है,भवन सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि छ्ग की सांस्कृतिक पहचान, प्रगतिशील भावना का प्रतीक है।भवन केवास्तु विद संदीप श्रीवास्तव के अनुसार भवन का निर्माण वर्तमान और भविष्य की सुविधाओं को ध्यान में रख किया गया है।दिन में कभी बिजली बंद होने पर अंधेरा नहीं होगा,प्राकृतिक रौशनी यहां हमेशा रहेगी।अटल नगर में मंत्रालय के करीब निर्मित विधानसभा भवन अपनी शानदार,आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल इमारत के लिए भी जाना जाएगा।भवन के किसी भी कोने से सदन की कार्यवाही को भी देखा जा सकता है। सदन में बने गलियारों के निर्माण के दौरान ध्यानरखा गया है, सदन का विस्तार करने की भविष्य मेंजरूरत होगी तो बगैर किसी तोड़ फोड़ के आसानी से इसका विस्तार किया जा सकेगा भवन की छत में धान की बालियों-पत्तियों को उकेरा गया है।‘धान का कटोरा’ के नाम से विख्यात छ्ग के विस भवन की छत पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, यहां के ज्यादातर दरवाजे, फर्नीचर बस्तर के काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं,भवन को तीन हिस्सों में बनाया गया है,‘विंग-ए’ में सचिवालय है, ‘विंग-बी’ में सदन, सेंट्रल हॉल, सीएम और स्पीकर का कार्यालय है,‘विंग-सी’ में मंत्रियों के कार्यालय बने हुए हैं,परिसर में सौर संयंत्र के साथ ही वर्षा जल के संचयन के लिए 2 सरोवर भी बनाए जा रहे हैं, आधु निक ऑडिटोरियम सेंट्रल हॉल बनाया गया है,भवन में 500 दर्शक क्षमता का आधुनिक ऑडिटोरियम और 100 लोगों के बैठने की क्षमतावाला सेंट्रल हॉल भी है।भवन की वास्तु कला को आधुनिक पारंपरिक शैलियों का मिला-जुलारूप दिया गया है।
क्रिकेट, सियासत और
डॉ रमन की प्रेरणा….?
15 साल तक छत्तीसगढ़ के सीएम रहने वाले डॉ रमन सिंह को 2023 में भाजपा को बहुमत आने के बादभी सीएम की जगह स्पीकर बनाने के पीछे की कहानी तो अभी तक स्पष्ट नहीं है पर पीएम मोदी ने विधान सभा भवन के लोकार्पण समारोह में क्रिकेट को सियासत से जोड़ डॉ रमन सिंह की स्थिति स्पष्ट करने का कुछ इशारा जरूरकिया ।उन्होंने कहा- क्रिकेट में देखते हैं…जो कभी कैप्टन होता है,वो बाद में क्रिकेट खिलाड़ी बनकर भी खेलता है,लेकिन राजनीति में ऐसा देखने को नहीं मिलता है..? ये उदाहरण डॉ रमनसिंह दे सकते हैं।कभी कैप्टन (सी एम) हुआ करते थे, आज सच्चे स्पिरिट से छत्तीसगढ़ की सेवा के लिये समर्पित हर कार्यकर्त्ता के लियेप्रेरणा के रूप में कार्य कर रहे हैं, संभवत: उनका इशारा सी एम रहने के बाद बिना किसी विरोध के स्पीकर बनने राजी होने से ही था.?
और अब बस…..
0 ज्यादा खर्च, कर्ज याफिर टैरिफ का दवाब….? क्यों खाली हुई देश की तिजोरी, खजाने से कहां खर्च हो गए 60 हजार करोड़ ₹,रिजर्व बैंक को बेचना पड़ा 35 टन सोना…..?
0 25 सालों के छ्ग में अजीत जोगी,डॉ रमनसिंह, भूपेश बघेल के बाद अब विष्णुदेव साय सीएम हैं।
0 छत्तीसगढ़ राज्य में अभी तक13 मुख्य सचिव बन चुके हैं।
0 पीएम ने छ्ग प्रवास पर केवल विष्णुदेव साय, डॉ रमनसिंह को ‘भाव’ दिया, जिससे खुद को बड़ा मंत्री समझने वाले मायूस नजर आये….?

