महाराणा प्रताप स्कूल में “एकाग्रता की शक्ति” पर प्रेरक एवं वैज्ञानिक सत्र का सफल आयोजन

रायपुर। महाराणा प्रताप स्कूल, केसरी बगीचा, भाठागांव, रायपुर में शनिवार को कक्षा 6 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए “एकाग्रता की शक्ति और सफलता की राह” विषय पर एक विशेष प्रेरक एवं शैक्षणिक सत्र का सफल आयोजन किया गया। यह सत्र विश्वविख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. डैनियल पी. ब्राउन की पुस्तक The Elephant Path: Attention Development and Training in Children and Adolescents तथा उनके ध्यान एवं उच्च प्रदर्शन (Peak Performance) संबंधी शोध एवं प्रशिक्षण पद्धति से प्रेरित था।

सत्र का संचालन डॉ. सत्यजीत साहू (एम.डी.), गुडविल हॉस्पिटल, रायपुर ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अत्यंत सरल, रोचक एवं वैज्ञानिक ढंग से समझाया कि सोचना (Thinking), ध्यान देना (Paying Attention) और जागरूकता (Awareness) तीन अलग-अलग मानसिक प्रक्रियाएँ हैं। सामान्यतः लोग इन तीनों को एक ही समझते हैं, जबकि जीवन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इनके बीच का अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. साहू ने बताया कि सोचना विश्लेषण, योजना, निर्णय और स्मरण की प्रक्रिया है, जो सीखने और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक है, किन्तु आवश्यकता से अधिक सोच वास्तविक प्रदर्शन में बाधा बन सकती है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि परीक्षा के दौरान, खेल प्रतियोगिता में या मंच पर बोलते समय अत्यधिक सोच व्यक्ति के आत्मविश्वास और प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि ध्यान (Attention) वह क्षमता है जिसके द्वारा मन को किसी एक कार्य या लक्ष्य पर स्थिर रखा जाता है। पढ़ाई के समय पुस्तक पर ध्यान बनाए रखना, शिक्षक की बातों को मन लगाकर सुनना अथवा किसी समस्या को पूरी एकाग्रता से हल करना इसी क्षमता के उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि निरंतर अभ्यास द्वारा ध्यान को मजबूत बनाया जा सकता है और यही उत्कृष्ट अध्ययन तथा सफलता की आधारशिला है।

सत्र का सबसे महत्वपूर्ण विषय जागरूकता (Awareness) रहा। डॉ. साहू ने विद्यार्थियों को समझाया कि जागरूकता केवल किसी एक वस्तु पर ध्यान केंद्रित करना नहीं, बल्कि अपने विचारों, भावनाओं, शरीर और आसपास के वातावरण के प्रति सजग बने रहने की व्यापक क्षमता है। उन्होंने कहा कि जब जागरूकता विकसित होती है, तब व्यक्ति अपने भटकते हुए ध्यान को शीघ्र पहचानकर पुनः सही दिशा में लगा सकता है। यही क्षमता जीवन में आत्मनियंत्रण, भावनात्मक संतुलन तथा रचनात्मकता का आधार बनती है।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि डॉ. डैनियल पी. ब्राउन के अनुसार उत्कृष्ट प्रदर्शन का विकास तीन चरणों में होता है। प्रारंभिक अवस्था में व्यक्ति के ऊपर विचारों का प्रभुत्व रहता है और ध्यान बार-बार भटकता है। अभ्यास के साथ ध्यान विचारों से अधिक शक्तिशाली हो जाता है, जिससे कार्य में स्थिरता आती है। उच्चतम स्तर पर जागरूकता प्रमुख हो जाती है, जहाँ ध्यान सहज रूप से कार्य करता है और विचार केवल आवश्यकता पड़ने पर ही सक्रिय होते हैं। यही अवस्था उत्कृष्ट खिलाड़ियों, कलाकारों, वैज्ञानिकों तथा सफल विद्यार्थियों की पहचान मानी जाती है।

डॉ. साहू ने आधुनिक तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) के संदर्भ में भी विद्यार्थियों को बताया कि मस्तिष्क में सोच, ध्यान और जागरूकता से जुड़े अलग-अलग तंत्र सक्रिय होते हैं। उन्होंने इस वैज्ञानिक समझ को विद्यार्थियों की दैनिक पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी, खेल, संगीत तथा व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए अनेक व्यावहारिक अभ्यास भी कराए। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया और सत्र को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के डायरेक्टर एडवोकेट संतोष ठाकुर, प्राचार्या श्रीमती भारती ठाकुर, विद्यालय के समस्त शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समन्वय और संचालन में श्री सूरज दुबे एवं श्री हेमंत सिंह ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया, जिसके कारण पूरा आयोजन सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने डॉ. सत्यजीत साहू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों के लिए एकाग्रता, आत्म-अनुशासन और जागरूकता जैसे विषय अत्यंत प्रासंगिक हैं। ऐसे वैज्ञानिक एवं प्रेरक सत्र विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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