9 किलोमीटर की पदयात्रा और जय माता दी के जयघोष से गूंजा सुकमा,
माता रामारामिन के दरबार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
पहली बार निकली भव्य देवी चुनरी पदयात्रा बनी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक
अधिवक्ता दीपिका शोरी ने अर्पित किया 56 भोग,
भव्य भंडारे और भजन-कीर्तन में भक्तिमय हुआ रामाराम धाम 
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील रहे सुकमा इलाके में अब नक्सल मुक्ति का असर साफ दिखाई दे रहा है। इसे समझने के लिए यहां हुई पहली बार चुनरी यात्रा को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। समाजसेवी और अधिवक्ता दीपिका सोरी ने इस आयोजन की पहल की। हर समाज और हर वर्ग का व्यक्ति इस यात्रा में बड़े उत्साह के साथ शामिल हुआ। भक्ति और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में सुकमा जिले में पहली बार भव्य देवी चुनरी पदयात्रा अपने आप में एक नया संदेश दे रही थी। बस्तर क्षितिज सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस पदयात्रा में तोंगपाल से कोंटा तक के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। 55 मीटर लंबी चुनरी लेकर निकले भक्तों ने लगभग 9 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर माता चिटमिटीन अम्मा रामारामिन के पावन दरबार में चुनरी अर्पित की। 
नौ किलोमीटर तक गूंजे जयकारे, मोहरी बाजा ने बांधा समां
शाम 5 बजे सुकमा नगर से प्रारंभ हुई पदयात्रा में महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में चुनरी और जुबां पर जय माता दी के जयघोष के साथ श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर आगे बढ़ते रहे। स्थानीय मोहरी बाजा और देवी गीतों की मधुर धुनों ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया। रात्रि लगभग 8 बजे श्रद्धालु रामाराम धाम पहुंचे, जहां 55 मीटर लंबी चुनरी माता के चरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई। इस दौरान भक्तों ने जिले और बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
अधिवक्ता दीपिका शोरी ने अर्पित किया छप्पन भोग
बस्तर क्षितिज सामाजिक सेवा समिति की संस्थापिका एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी ने माता रामारामिन को विधि-विधान से 56 भोग अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ आयोजन में सेवा, समर्पण और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी दिया गया। 
भव्य भंडारा और भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु
चुनरी अर्पण के बाद मंदिर परिसर में भव्य भंडारे और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और माता के भजनों पर भक्तिभाव से झूमते नजर आए। सामूहिक प्रसाद वितरण ने सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव की सुंदर मिसाल प्रस्तुत की।
बस्तर की संस्कृति और सनातन आस्था का अनूठा संगम
समिति की इस पहल ने धार्मिक आस्था के साथ बस्तर की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दी। आयोजन में समिति के सदस्य संजय सिंह भदौरिया, गौरव राठौर, रेखा शोरी, अनुपमा ठाकुर, राजू राठौर, पुष्पलता भदौरिया और अमन भदौरिया शामिल रहे। वहीं मनोज देव, गुप्तेश्वर गंगबेर, राम नारायण मिश्र,अरुण मिश्रा,भुवनेश्वरी यादव, नर्मदा मेडम,व्यवसायी राजू भैया,युवराज ठाकुर,पंकज सोलंकी, अमित नाग,दीपक नेताम,ललित गांधी,राजकिशोर यादव,विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अनिल टावरी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। 
भक्ति, सेवा और एकता का संदेश
55 मीटर चुनरी, नौ किलोमीटर की पदयात्रा, छप्पन भोग, भंडारा और भजन-कीर्तन के साथ संपन्न यह आयोजन सुकमा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए यादगार बन गया। बस्तर क्षितिज सामाजिक सेवा समिति की इस पहल ने श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोते हुए संदेश दिया कि आस्था केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता में भी जीवंत होती है। माता रामारामिन के दरबार में गूंजते जयकारों के बीच पूरा आयोजन श्रद्धा और भक्ति का अनुपम उदाहरण बना।