आपातकाल योद्धाओं की स्मृति में विजय स्मारक बने : उपासने
रायपुर। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं लोकतंत्र प्रहरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर मांग की है कि आपातकाल के दौरान प्रदेश में जिन सेनानियों ने तानाशाही सरकार का विरोध किया, 21 माह जेलों की यातनाएं सहीं, सड़कों पर निकलकर जीवन भर जेल में रहने का संकल्प लेकर सत्याग्रह किया और स्वतः गिरफ्तार हो जेल गए, यह पीढ़ी लोकतंत्र की रक्षा करने वाली भावी पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनेगी तथा इतिहास में दर्ज होगी। क्योंकि यह आजादी की दूसरी लड़ाई के वाहक हैं।यही कारण है कि आपकी सरकार ने इन्हें लोकतंत्र सेनानी का दर्जा देकर सम्मान निधि से जीवन पर्यंत तथा मृत्यु उपरांत राजकीय सम्मान प्रदान किया है। ये सेनानी और उनके परिवार कभी विस्मृत न हों, वह काला अध्याय सदा स्मरण रहे, इसलिए प्रधानमंत्री ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में प्रतिवर्ष मनाने की घोषणा की है। जिस दिन इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता की खातिर लोकतंत्र समाप्त कर तानाशाही राज स्थापित किया, वह तो काला दिवस है।लेकिन 21 माह के संघर्ष के बाद हुए चुनाव में देश की जनता ने भय और आतंक के साये में कराए गए चुनाव में अपने लोकतांत्रिक अधिकार से एक वोट देकर तानाशाही सत्ता को उखाड़ फेंका तथा 21 मार्च 1977 को लोकतंत्र बहाल किया। इस कारण इस दिन को प्रतिवर्ष ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ के रूप में प्रदेश में घोषित कर प्रत्येक जिले में विजय स्तंभ का निर्माण किया जाए। इन स्तंभों पर उस जिले के लोकतंत्र सेनानियों के फोटो, नाम-पत्रिकाएं तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा स्थापित कर स्थायी विजय स्मारक बनाया जाए। ताकि प्रतिवर्ष 25 जून को काला दिवस-संविधान हत्या दिवस तथा 21 मार्च को विजय दिवस मनाकर सेनानियों व उनके परिवारों का सम्मान किया जाए और उस कालखंड को प्रदेश में हमेशा स्मरण रखा जाए। उपासने ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि आगामी 21 मार्च को प्रदेश में लोकतंत्र विजय दिवस आयोजित कर जिलों में विजय स्मारक या स्तंभ निर्माण की घोषणा की जाए। उक्त जानकारी आलोक श्रीवास्तव
प्रदेश मीडिया प्रभारी,लोकतंत्र सेनानी संघ छत्तीसगढ़ ने दी।