कितने सांचोँ में ढल के आये हैं… ख्वाब की तरह पल के आये हैं… तुम सिफारिश से जहाँ पहुंचे हो… हम वहाँ खूद ही चलकर आये हैं…

शंकर पांडे ( वरिष्ठ पत्रकार )   

हाय पैसा…. हाय पैसा… और पैसा कमाने के ही चक्कर में छ्ग में कुछ आईएएस जेल में हैं तो स्टेट कॉडर की अफसर सौम्या चौरसिया फिर जेल पहुंच गई है यदि सब कुछ ठीक होता तो आज वह आई एएस पदोन्नत हो चुकी होती? पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, सौम्या तो कोयला शराब घोटाले आदि में भी शामिल हैं(जाँच एजेंसी के अनुसार) ।छत्तीसगढ़ के राइस किंग नेमी चंद श्रीश्रीमाल चाँवल नहीं खा सकते थे,क्योंकि उन्हें ‘शुगर’ था,छ्ग के ही लिकर किंग(शराब ठेकेदार) सुच्चा सिंह शराब नहीं पी सकते थे क्योंकि उन्हें शुगर था, कुछ वैसा ही हाल छ्ग के कुछअफ सरों का है,करोड़ों का वारा- न्यारा किया?पऱ जेल में सूखी रोटी खाने मजबूर हैं…ऐसी कमाई का क्या फायदा…? इधर कुछ आईपीएस की भी नींद उडी हैं कब जाँच के बाद जेल पहुंच जाएँ..?अब अतीत की तरफ लौटते हैं….अंग्रेज शासकों ने गुलाम भारत में दृढ़ता से शासन करने के लिये न्याय व्यवस्था,नौकरशाही की एक शक्ल का सूत्रपात किया था।1860 में ‘भारतीय दण्ड विधान’और कालांतर में 18 72में ‘भारतीय साक्ष्य अधि नियम’ अस्तित्व में लाया था।1861में ही अंग्रेजों ने आई सीएस (इम्पीरियल सिविल सर्विसेज) एक्ट लागू किया। इस एक्ट को अधिकारियों की कर्तव्य निष्ठा,सेवाभावना और निष्पक्षता के चलते ‘स्टील फेम सर्विस’ के तौर पर आंक लित किया गया। इस सेवा में शुरुवाती दौर में इंग्लैंड से ही अफसर आते थे। शनै: शनै: होनहार भारतीयों को इस सेवा में शामिल होने का मौका दिया गया तो आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस सेवा की महत्ता,उपदेयता के दृष्टिगत इसे ‘स्टील फेम ऑफ इंडिया’ की संज्ञा प्रदान की। 1947 में देश के स्वतंत्र होने पर आईसीएस की जगह इंडियन सिविस सर्विस का सूत्रपात हुआ जिसमें आईए एस,आईपीएस चयन हेतु पहली बार वर्ष 1947 में अभा परीक्षा संपन्न हुई,19 66 में परीक्षा के साथ अभा वनसेवा,विदेश सेवा, अन्य एलाइड सर्विसेज भी समा हित होती गई,1959 में लाल बहादुर शास्त्री प्रशा सनिक अकादमी का सूत्र वाक्य भी अपने में विस्तृत भाव सन्नि हित किये हुए है ‘शील परम भूषण’। यह सूत्र वाक्य उच्च मूल्यों,आदर्शों की याद भी दिलाता है। मौजूदा हालात में तो अखबारों की सुर्खियां कुछ यूं नजर आती है। भ्रष्टाचार में आईएएस बर्खास्त (मप्र) सी बीआई को रिश्वत देने के आरोपी आईएएस बर्खास्त (छग) शराब, खनिज, सट्टा, डीऍमएफ, कोयला घोटाला में कुछ आई एएस, पूर्व आईए एस, स्टेट कॉडर के अफसर गिरफ्तार (छ्ग)चारा घोटाले में मुख्य सचिव को कैद (झारखंड) निलंबित आईए एस दम्पत्ति के 80 बैक खाते सीज (मप्र) करोड़ों के प्रिटिंग घोटाले में आईएएस गिर फ्तार (असम) नकल करते पकड़ाया आई पीएस (तमिल नाडु) प्रशिक्षु आईएएस के लिए घूस लेते पकड़ा गया एक चपरासी, आईएएस मंत्रालय अटैच (छग)आईजी अनिवार्य सेवानिवृत्त (छग) बलात्कार के आरोपी आईए एस ने किया सरेंडर (राज स्थान) आदि आदि….। आला हुक्मरानों से सीख लेकर नेताओं-अपराधियों से जुगल बंदी कर भ्रष्टा चार के चलते कुछ अधिकारी जेल में रह गौरवशाली सेवा को तिलां जलि देते नजर आ रहे हैं। नवोदित छग में कुछ अभा सेवा केअफसरों के खिलाफ शिकायत है हर विधान सभा सत्र में आंकड़े बताए जाते है पर लंबित मामलों की कब जांच होगी, सरकार खुलासा नहीं करती है। दरअसल भारतीय प्रशासनिक सेवा के कुछेक अधिकारी सत्ताधारी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की भांति आचरण करके जो उदाहरण पेश करते हैं वह भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह ही लगाता है।अपने राजनीतिक आकाओं की जी-हजूरी कर सेवाकाल में तोअच्छे पदों पर रहते ही हैं,सेवानिवृत्ति बाद नौकरशाह आयोगों तथा अन्य संस्थाओं में बकायदा पूरे लाव लश्कर के साथ पुर्ननियुक्ति की भी सौगात पाने में सफल रहते हैं। यह कहने में कोई संकोच भी नहीं है कुछ अफसरों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के गौरवशाली अतीत को भ्रष्टा चार- विलासिता, राजनीतिक जी-हुजूरी का काकटेल बना कर रख दिया है, सेवाकाल में ही कुछ नौकरशाह करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों के मालिक बन जाते हैं क्यों….?

11 हजार पंचायतें:मनरेगा के क्यू आर कोड तकनीक को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

छ्ग की पंचायतों में क्यू आर कोड आधारित मनरेगा पहल को विशेष श्रेणी में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025- 2026 मिला है।साय सरकार द्वारा प्रारम्भ क्यू आर कोड आधारित प्रणाली में मनरेगा से सम्बंधित सभी जानकारी उपलब्ध है। मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा के अनु सार क्यू आर कोड प्रणाली मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाने नई तकनीक है,पंचायत भवन सहित सार्वजानिक स्थानों पऱ लगाया गया है।11हजार पंचा यतों में अभी तक क्यू आर कोड को 1सितंबर से 3लाख 70 हजार से अधिक स्केन किया जा चुका है।

धर्म परिवर्तन और
कब्र पर कलह क्यों…. 

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में परंपरा और धर्म परिवर्तन के बीच की लकीर अब हिंसा की खूनी इबारत लिख रही है, जहां कभी सामुदायिक एकजुटता मिसाल हुआ करती थी, आज वहां ‘आम पंडुम’ जैसे लोक त्योहारों और शव दफनाने की भूमि को लेकर गहरे मतभेद उभर आए हैं।बस्तर संभाग और कांकेर में विवाद जमीन का टुकड़ा हासिल करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अपनी जड़ों, पहचान- अधि कारों को बचाने की एक बेहद संवेदनशील लड़ाई बन चुका है। इस लड़ाई को कुछ ऐसे समझिए….मीठे आम को लेकर भी कड़वाहट भर जाती है। कई आदिवासी इलाकों में परंपरा है कि जब तक ‘आम पंडुम’@ का त्योहार नहीं मनाते, आम नहीं खाते, आरोप यह लगते हैं जिन लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया है, वे पहले ही आम तोड़कर बाजार में बेचने लगते हैं,जब तक पंडुम आता है तब तक आम खत्म? बात सुनने में छोटी है, लेकिन गांव के सामूहिक जीवन में यही छोटी- छोटी चुभनें रिश्तों में दूरी बनाती हैं और जब वही दूरी किसी की अंतिम विदाई यानी शव दफनाने तक पहुंच जाती है,विवाद सिर्फ जमीन का नहीं रहता,पहचान, परं परा,शक्ति, अधिकार का बन जाता है। छ्ग के कई आदि वासी गांवों में अंतिम संस्कार, दफन की जगहें समुदाय- आधारित होती हैं, किस समाज का कब्रिस्तान/ श्म शान कहां होगा, किस रीति से विदाई होगी,इन पर ग्राम- समुदाय की मजबूत परंपराएं हैं,जब कोई ईसाई धर्म अप नाता है, तो अंतिम संस्कार की रीति बदल जाती है….। पादरी, प्रार्थना, बाइबिल, कब्र का स्वरूप।कई गांवों में यही बदलाव बहस खड़ी करता है क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी वही व्यक्ति गांव के पारंपरिक कब्रिस्तान में दफनाया जा सकता है या नहीं…? बहस को कानूनी,ज्यादा जटिल बनाता है बस्तर जैसे अनु सूचित क्षेत्रों में लागू पेसा, यानी पंचायत विस्तार अधि नियम..।जमीनी स्तर पर ग्राम सभा के फैसलों को कई बार परंपरा, संस्कृति की रक्षा के नाम पर ताकत मिलती है, दूसरी तरफ,परिवार कहता है कि अंतिम संस्कार सम्मान – गरिमा का अधिकार है,यह नागरिक अधिकार भी है।यही वजह है कई मामले अदालतों तक पहुंचे हैं। हाल ही सर्व समाज ने धर्मान्तण को लेकर छतीसगढ़ बंद का भी आयो जन किया था।

छ्ग में 13% मतदाताओं
के नाम क्या कटेंगे…..?  

छ्ग में आयोजित सर्वे ऑफ इनएलिजिबल वोटर्स (SIR) के दौरान मतदाता सूची की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।कुल 26 लाख 17 हजार 165 नाम प्रार म्भिक तौर पऱ हटाने की बात सामने आई हैं जो कुल मत दाता का 13% है, यहां यह बताना जरुरी है, पिछले विस चुनाव में 4% का फर्कभाजपा -कांग्रेस में जीत हार का अंतर था।एसआईआर के दौरान कुल 1करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 गणना प्रपत्र मत दाताओं से एकत्र किए गए।सर्वे में यह पता चला मत दाता सूची में कई ऐसे नाम थे,जो अब पात्र नहीं रहे। जांच में 6 लाख 42 हजार 234 मतदाता की मृत्यु हो चुकी थी,19 लाख 13 हजार 540 मतदाता शिफ्ट या अनु पस्थित पाए गए और 1 लाख 79 हजार 43 मतदाता के नाम सूची में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।प्रशासन ने स्पष्ट किया है, मतदाताओं के नाम सर्वे के दौरान हटा दिए गए हैं, वे दावा एवं आपत्ति (23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026) के दौरान पुनः मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर प्राप्त करेंगे।

नक्सली गणेश उइके
भी मारा गया…… 

नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर गणेश उईके के मारे जाने की खबर है,गणेश उईके पर लग भग 01करोड़ 20 लाख रुपए इनाम घोषित था,गणेश उईके को पाका हनुमंथु और राजेश तिवारी के नाम से भी जाना जाता है। लंबे अरसे से गणेश उईके उड़ीसा राज्य में था।सक्रिय माओवादी संगठन ने गणेश को उड़ीसा राज्य की जिम्मेदारी दी थी, गणेश की 7 राज्यों में तलाश थी ,साउथ सब जोनल का इंचार्ज गणेश, तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला था।गणेश के साथ 2 महिला समेत 3 पुरुष कुल 5 नक्सली मारे गए।

और अब बस…….

0रायपुर लोकसभा खेल महोत्सव में 542 गाँवोँ से 85 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, यह देश में रिकार्ड भागीदारी रही।यह सांसद बृजमोहन अग्रवाल के अथक प्रयास का नतीजा है।
0छग सरकार ने सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) की पुरानी व्यवस्था में बड़े बद लाव किए हैं। अब राज्य के मंत्री,गृहमंत्री, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधि कारियों को सामान्य दौरों, जिलों के निरीक्षण,भ्रमण, आगमन-प्रस्थान के दौरान सलामी नहीं दी जाएगी।
0 छ्ग में बिजली स्मार्ट मीटर लगना शुरू…उधर मप्र में लगे इन्हीं मीटरों की बड़ी शिका यत मिल रही है…?
(कॉलम 20 सालों से लगातार)

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